The purpose of Manthan Is the process of getting clarity of अमृत means the real wisdom or truth and विष poison means getting the vision means दृष्टी of the all the gaps or loopholes or those things which are taking us away from our own self with nature from our being or from harmony due to the wrong assumption of peace, happiness, power or actions or harmony or living the life itself.
मंथन is the process of awakening, where we are losing our way, path of living life with the truth, with nature, in oneness, with consciousness or with the true wisdom with its clarity and its दृष्टी vision.✨
With this clarity, the things can start falling in place, with the true or right actions , true or right livelihoods, true education with true culture and true lifestyle.
– Sama, Mumbai
अब तक की मेरी संक्षिप्त जीवन यात्रा में ज्ञान की विभिन्न विधाओं से परिचय हुआ। इस क्रम में दर्शन शास्त्र का विद्यार्थी होने के नाते द्वैत, अद्वैत से लेकर एकात्मवाद तक, यथेष्ट चिंतन की अनेक धाराओं को जानने समझने का मौका मिला। इन धाराओं के माध्यम से भारत के विराट स्वरूप की झलक पाना भी इस चिंतन यात्रा का एक अहम लक्ष्य था। इस यात्रा की पूर्णता का मंतव्य लेकर, मैं बीते डेढ़ दशक से हिमालय की कंदराओं से लेकर रेगिस्तान की पथरीली राहों तक की खाक छान रहा था। कोरोना काल के बाद आध्यात्मिक चिंतन की डगर, उपयुक्त पड़ाव के अभाव में बेहद मुश्किल जान पड़ी।
ऐसा भी महसूस हुआ कि शायद मैं इस मार्ग पर चलने की पात्रता हासिल नहीं कर पाया हूं। इसलिए सह अस्तित्ववाद को सारथी बनाकर कृषि के माध्यम से प्रकृति की सेवा करने का ध्येय लेकर, दिल्ली से अपने गांव लौट आया। बीते 4 सालों से इसी रास्ते पर चल रहा हूं। इसका मकसद अपने विचारों से मेल खाने वालों की छोटी सी दुनिया बनाना है।
मन के किसी कोने में यह बात भी चल रही थी कि जिस उदात्त भारत की कल्पना हमने कभी की थी, शायद इस दौर को उस भारत की दरकार ही नहीं है।
किंतु, 7 से 9 मार्च तक सोहागपुर में “Manthan” ने आशा और अपेक्षा की अलख जगा दी। आपके ज्ञान की गहराई और आपके चिंतन के विराट उद्देश्य ने मेरे अंतस को उद्वेलित कर दिया।
मन मस्तिष्क पर छूटी अमिट छाप को इस बात से ही समझा जा सकता है कि अरण्यानि से वापस आने के बाद आप तक अपने मन की बात पहुंचाने का साहस जुटाने में मुझे 3 दिन लग गये। अस्तु, आप जिस महान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सतत प्रयासरत हैं, उसका मार्ग कठिन जरूर है, किंतु आपकी प्रतिबद्धता, हर बाधा को पार करने का हमें विश्वास दिलाती है।
इस पुनीत कार्य में मेरे जैसे शब्द साधक, यदि किसी काम आ सकें, तो ये हमारा सौभाग्य होगा। आपका मार्गदर्शन हमारे लिए प्राणवायु के समतुल्य है।
सादर
निर्मल , Jhansi
To get to the depth of Manthan, we need to become receptive, listen deeper, and be fully available.
– Urmila, Pune
What a quantum leap in the world of understanding the open secret. Amazing, amazing, and amazing…..
– Aruna, Delhi
बहुत कुछ स्पष्ट हो रहा है, धीरे-धीरे गहरी समझ बनती जा रही है, और उतना ही ज्यादा लग रहा है कि अभी बहुत कुछ समझना जानने की जरूरत है, धीरे-धीरे जैसे चेतना और आत्मविश्वास दोनों बहुत कुछ देख सुन पा रहे हो बहुत कुछ स्पष्ट हो रहा हो, बहुत सारी चीजों को देखने की दृष्टि ही जैसे बदल गई हो, कुछ बेहतर होने के लिए जैसे हम सब लोग जुड़ते जा रहे हैं और यह कारवां ऐसा लगता है जैसे बढ़ता ही रहेगा।
– Alok, Kanpur
इस बार के मंथन मे तो सभी विषय अपने उच्चतम पायदान पर थे (भारत , चेतना, जादू और संबंधित खिलौने, हास परिहास, विचारों और समझ कि गहराई और गहरे लोग), अद्भुत
– Pawan, Pauri
I got a lot of clarity about many things in my life after attending the Manthan Camp in Sohagpur, MP. It was a very positive experience to meet many linked-minded people.
– Sanjeev









